ब्रूनर का अधिगम सिद्धांत (Bruner’s Theory of Learning)

Jerome Seymour Bruner

जेरोम ब्रूनर

जेरोम सेम्योर ब्रूनर (Jerome Seymour Bruner)

प्रतिपादक

प्रतिपादक: जेरोम सेम्योर ब्रूनर (Jerome Seymour Bruner)

जन्म – मृत्यु: 1 अक्टूबर 1915 – 5 जून 2016

देश: संयुक्त राज्य अमेरिका (अमेरिका)

क्षेत्र: संज्ञानात्मक मनोविज्ञान एवं शिक्षा शास्त्र

सिद्धांत का प्रतिपादन काल: 1960 के दशक (विशेष रूप से 1960 ई.)

प्रमुख पुस्तकें:

  • The Process of Education (1960)
  • Toward a Theory of Instruction (1966)
  • Acts of Meaning (1990)

प्रमुख नाम / उपनाम:

  • खोज द्वारा अधिगम सिद्धांत
  • संज्ञानात्मक विकास सिद्धांत
  • संरचना-आधारित अधिगम सिद्धांत
  • स्पाइरल पाठ्यक्रम सिद्धांत

ब्रूनर का मूल दृष्टिकोण

ब्रूनर संज्ञानात्मक मनोविज्ञान के प्रमुख प्रवर्तकों में से एक थे। उन्होंने शिक्षा को सक्रिय, खोजपरक और चिंतनात्मक प्रक्रिया माना। उनके अनुसार बालक केवल सूचना ग्रहण नहीं करता, बल्कि ज्ञान की संरचना स्वयं निर्मित करता है।

ब्रूनर के अधिगम सिद्धांत के मुख्य विचार

  1. अधिगम एक सक्रिय (Active) एवं रचनात्मक प्रक्रिया है।
  2. बालक स्वयं खोज करके ज्ञान को अधिक अच्छे ढंग से समझता है।
  3. ज्ञान का वास्तविक मूल्य उसकी संरचना (Structure) में निहित होता है, न कि तथ्यों की मात्रा में।
  4. पूर्व ज्ञान (Prior Knowledge) नए ज्ञान के अधिगम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  5. अधिगम तब प्रभावी होता है जब विद्यार्थी प्रश्न पूछता है, अनुमान लगाता है और निष्कर्ष निकालता है।

अधिगम के तीन चरण (Modes of Representation)

ब्रूनर के अनुसार किसी भी आयु का व्यक्ति ज्ञान को तीन रूपों में ग्रहण कर सकता है।

  1. क्रियात्मक / सक्रिय चरण (Enactive Mode)
    सीखना कार्य, गतिविधि और प्रत्यक्ष अनुभव से
    हाथों से करके सीखना
    प्राथमिक स्तर पर अधिक प्रभावी
    उदाहरण:
    गेंद उछालकर गति समझना
    गिनती के लिए कंकड़ या वस्तुएँ गिनना
  2. चित्रात्मक चरण (Iconic Mode)
    चित्र, चार्ट, नक्शे, मॉडल के माध्यम से सीखना
    दृश्य स्मृति का प्रयोग
    उदाहरण:
    आरेख द्वारा हृदय की संरचना
    चित्रों से कहानी समझना
  3. प्रतीकात्मक चरण (Symbolic Mode)
    भाषा, संख्याएँ, चिन्ह, सूत्र
    अमूर्त चिंतन का विकास
    उदाहरण:
    गणितीय सूत्र
    लिखित भाषा, वैज्ञानिक संकेत

👉 अधिगम ठोस से अमूर्त की ओर बढ़ता है, परंतु ये चरण कठोर नहीं होते।

तीन चरणों का चित्रण

ब्रूनर के अधिगम के तीन चरण

चरण डायग्राम

क्रियात्मक, चित्रात्मक, प्रतीकात्मक चरण

स्पाइरल पाठ्यक्रम डायग्राम

ब्रूनर का स्पाइरल पाठ्यक्रम

खोज द्वारा अधिगम (Discovery Learning)

अवधारणा: विद्यार्थी स्वयं प्रयोग, अवलोकन और तर्क द्वारा ज्ञान की खोज करता है।

भूमिकाएँ:

  • शिक्षक – मार्गदर्शक, सहायक
  • विद्यार्थी – खोजकर्ता, अन्वेषक

विशेषताएँ:

  • समस्या समाधान
  • आलोचनात्मक चिंतन
  • स्थायी अधिगम
  • आत्मविश्वास में वृद्धि

ब्रूनर का स्पाइरल पाठ्यक्रम सिद्धांत

किसी भी विषय को सरल रूप में प्रारंभ में पढ़ाया जाए

बाद की कक्षाओं में वही विषय बार-बार, अधिक गहराई और जटिलता के साथ पढ़ाया जाए

प्रत्येक स्तर पर पूर्व ज्ञान का पुनर्गठन

👉 “कोई भी विषय किसी भी आयु के बच्चे को उसकी बौद्धिक अवस्था के अनुसार पढ़ाया जा सकता है।”

स्पाइरल पाठ्यक्रम

ब्रूनर का स्पाइरल पाठ्यक्रम

शैक्षिक महत्व (Educational Implications)

  1. विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण
  2. समस्या-आधारित अधिगम
  3. अनुभव-आधारित शिक्षण
  4. रटने की प्रवृत्ति में कमी
  5. रचनात्मकता एवं तार्किक सोच का विकास
  6. आजीवन अधिगम की आदत

विभिन्न विषयों में अनुप्रयोग

गणित: वस्तुओं से गिनती → चित्र → संख्यात्मक चिन्ह

विज्ञान: प्रयोग → आरेख → सिद्धांत

भाषा: चित्र → शब्द → वाक्य संरचना

ब्रूनर के सिद्धांत की सीमाएँ

सभी विषयों में खोज अधिगम व्यावहारिक नहीं

समय और संसाधन अधिक लगते हैं

कमजोर विद्यार्थियों के लिए कठिन

शिक्षक का उच्च कौशल आवश्यक

परीक्षा-उपयोगी तथ्य (One Liners)

ब्रूनर अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे

उनका सिद्धांत संज्ञानवाद पर आधारित है

खोज द्वारा अधिगम इसका मूल तत्व है

स्पाइरल पाठ्यक्रम की अवधारणा दी

शिक्षक मार्गदर्शक की भूमिका में

निष्कर्ष

ब्रूनर का अधिगम सिद्धांत आधुनिक शिक्षा की आधारशिला है। यह रटने की शिक्षा के स्थान पर सोचने, खोजने और समझने की शिक्षा पर बल देता है। आज की नई शिक्षा नीति, रचनात्मक शिक्षण और गतिविधि-आधारित शिक्षा में इस सिद्धांत की स्पष्ट झलक मिलती है।